विवाह प्रमाण पत्र कैसे और कहाँ बनता है? पूरी जानकारी (2026)
Vivah Praman Patra Online/Offline कैसे बनवाएं?
नमस्कार, दोस्तों विवाह प्रमाण पत्र एक बेहद जरूरी सरकारी दस्तावेज होता है, जो यह साबित करता है कि दो लोग कानूनी रूप से पति-पत्नी हैं। आज के समय में यह प्रमाण पत्र सिर्फ एक औपचारिक कागज़ नहीं, बल्कि कई जरूरी कामों की बुनियाद बन चुका है। पासपोर्ट बनवाने, बैंक से जुड़ी प्रक्रियाओं, बीमा क्लेम, संपत्ति से जुड़े मामलों या सरकारी योजनाओं का लाभ लेने जैसे कामों में इसकी जरूरत पड़ती है। इसलिए शादी के बाद इस दस्तावेज़ को बनवाना बहुत समझदारी का कदम माना जाता है।
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| विवाह प्रमाण पत्र कैसे और कहाँ बनता है? पूरी जानकारी (2026) |
इस लेख में हम आपको आसान भाषा में बताएँगे कि विवाह प्रमाण पत्र कहाँ और कैसे बनता है, इसके लिए कौन-कौन से दस्तावेज़ जरूरी होते हैं, इसे बनवाना क्यों महत्वपूर्ण है, और इसे बनवाने में कितना समय और शुल्क लगता है। अगर आप शादीशुदा हैं या जल्द शादी करने वाले हैं, तो यह जानकारी आपके लिए बेहद काम की साबित होगी।
विवाह प्रमाण पत्र कहाँ बनता है?
विवाह प्रमाण पत्र एक महत्वपूर्ण कानूनी दस्तावेज है, जो विवाह के पंजीयन और वैधता का प्रमाण प्रदान करता है। भारत में इसके निर्माण और जारी करने की प्रक्रिया स्थानीय प्रशासनिक संरचनाओं के अनुसार भिन्न होती है, जो मुख्यतः शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अलग-अलग होती हैं।
नगर पालिका में विवाह प्रमाण पत्र
शहरी क्षेत्रों में विवाह प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया आमतौर पर नगर पालिका या नगर निगम कार्यालय के माध्यम से पूरी की जाती है। यदि विवाह शहर की सीमा के भीतर हुआ है, तो संबंधित नगर पालिका में पंजीयन करवाना आवश्यक होता है। आवेदन जमा करने के बाद अधिकारियों द्वारा दस्तावेज़ों की जाँच की जाती है, और सत्यापन पूरा होने पर आधिकारिक विवाह प्रमाण पत्र जारी किया जाता है। कई शहरों में अब यह सुविधा और भी आसान हो गई है, क्योंकि नगर पालिकाओं ने ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था शुरू कर दी है। इससे लोग घर बैठे फॉर्म भर सकते हैं और दस्तावेज़ अपलोड कर सकते हैं, हालांकि अंतिम सत्यापन के लिए कभी-कभी दंपत्ति को कार्यालय में उपस्थित होना पड़ सकता है।
जनपद पंचायत
ग्रामीण क्षेत्रों में विवाह प्रमाण पत्र जारी करने की जिम्मेदारी जनपद पंचायत या स्थानीय पंचायत कार्यालय की होती है। गाँव या पंचायत क्षेत्र में रहने वाले दंपत्ति को अपने क्षेत्र की पंचायत में आवेदन करना पड़ता है। वहाँ विवाह से संबंधित जानकारी दर्ज की जाती है और दस्तावेज़ों का सत्यापन किया जाता है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही प्रमाण पत्र जारी किया जाता है। अलग-अलग राज्यों में नियमों और प्रक्रियाओं में थोड़ा अंतर हो सकता है, इसलिए आवेदन से पहले स्थानीय कार्यालय से सही जानकारी लेना लाभदायक रहता है। इससे समय की बचत होती है और प्रक्रिया बिना किसी परेशानी के पूरी हो जाती है।
लोक सेवा केंद्र और ग्राहक सेवा केंद्र
लोक सेवा केंद्र (Public Service Center) और ग्राहक सेवा केंद्र (Common Service Centre) आज के समय में सरकारी सेवाओं को आसान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ये केंद्र ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में डिजिटल सुविधाएँ उपलब्ध कराते हैं। अधिकांश जगहों पर ये केंद्र सीधे विवाह प्रमाण पत्र जारी नहीं करते, लेकिन आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाने में पूरी मदद करते हैं। यहाँ से ऑनलाइन फॉर्म भरना, दस्तावेज़ स्कैन और अपलोड करना, आवेदन की स्थिति जानना और जरूरी जानकारी प्राप्त करना आसान हो जाता है। इस तरह ये केंद्र उन लोगों के लिए बेहद उपयोगी साबित होते हैं, जिन्हें सरकारी दफ्तरों की प्रक्रिया समझने में कठिनाई होती है या जिनके पास ऑनलाइन आवेदन करने की सुविधा नहीं होती।
विवाह प्रमाण पत्र बनाने के लिए आवश्यक दस्तावेज
आवेदन प्रक्रिया के दौरान निम्न दस्तावेज जरूरी होते हैं:
1. पति-पत्नी का पासपोर्ट साइज फोटो
आवेदन फॉर्म के साथ दोनों का हाल ही में खिंचवाया हुआ पासपोर्ट साइज फोटो लगाना होता है। यह फोटो पहचान और रिकॉर्ड के लिए उपयोग किया जाता है। आमतौर पर 2–4 फोटो मांगे जा सकते हैं, इसलिए आवेदन से पहले अतिरिक्त फोटो साथ रखना बेहतर रहता है।
2. पहचान पत्र (आधार कार्ड या अन्य आईडी)
पति और पत्नी दोनों का वैध पहचान पत्र देना जरूरी होता है, ताकि उनकी पहचान की पुष्टि की जा सके। इसके लिए आधार कार्ड सबसे सामान्य दस्तावेज माना जाता है। इसके अलावा वोटर आईडी, पैन कार्ड या ड्राइविंग लाइसेंस भी कई जगह स्वीकार किए जाते हैं।
3. निवास प्रमाण पत्र
यह दस्तावेज बताता है कि दंपत्ति किस क्षेत्र या पते पर रहते हैं। इसके लिए आधार कार्ड, राशन कार्ड, बिजली बिल, पानी का बिल या बैंक पासबुक जैसे दस्तावेज़ स्वीकार किए जा सकते हैं। निवास प्रमाण पत्र से यह तय होता है कि आवेदन किस नगर पालिका या पंचायत में किया जाएगा।
4. आयु प्रमाण पत्र
कानून के अनुसार विवाह के समय लड़के और लड़की की न्यूनतम आयु तय होती है, इसलिए आयु प्रमाण देना जरूरी होता है। इसके लिए जन्म प्रमाण पत्र, 10वीं की मार्कशीट या स्कूल ट्रांसफर सर्टिफिकेट जैसे दस्तावेज दिए जा सकते हैं। इससे अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने में मदद मिलती है कि विवाह कानूनी आयु के अनुसार हुआ है।
5. विवाह का प्रमाण
यह साबित करने के लिए कि विवाह वास्तव में संपन्न हुआ है, कोई न कोई प्रमाण देना होता है। इसमें शादी का निमंत्रण पत्र (कार्ड), पंडित या धर्मगुरु द्वारा दिया गया प्रमाण पत्र, शादी की फोटो, या गवाहों के बयान शामिल हो सकते हैं। कई जगह दो गवाहों की उपस्थिति भी अनिवार्य होती है।
6. चॉइस सर्टिफिकेट (यदि लागू हो)
कुछ मामलों में, जैसे अंतरजातीय विवाह या विशेष परिस्थितियों में हुए विवाह, “चॉइस सर्टिफिकेट” या सहमति से संबंधित दस्तावेज मांगा जा सकता है। यह प्रमाणित करता है कि विवाह दोनों पक्षों की सहमति से हुआ है। यह दस्तावेज हर जगह जरूरी नहीं होता, लेकिन कुछ राज्यों या विशेष योजनाओं में इसकी मांग की जा सकती है।
क्या विवाह प्रमाण पत्र बनवाना जरूरी है?
हाँ, आज के समय में विवाह प्रमाण पत्र बनवाना बहुत आवश्यक माना जाता है क्योंकि यह कई जगहों पर काम आता है। उदाहरण के लिए:
1. पासपोर्ट बनवाने में
यदि पति या पत्नी अपने पासपोर्ट में जीवनसाथी का नाम जोड़ना चाहते हैं, या शादी के बाद सरनेम बदलना हो, तो विवाह प्रमाण पत्र मांगा जाता है। यह दस्तावेज यह प्रमाणित करता है कि आप कानूनी रूप से विवाहित हैं। कई मामलों में नया पासपोर्ट बनवाते समय भी यह जरूरी होता है।
2. राशन कार्ड, आधार कार्ड आदि में पत्नी का नाम जोड़ने में
शादी के बाद पत्नी का नाम पति के परिवार के राशन कार्ड में जोड़ने या आधार कार्ड में पता बदलवाने के लिए विवाह प्रमाण पत्र उपयोगी होता है। इससे सरकारी रिकॉर्ड में वैवाहिक स्थिति और परिवार की जानकारी सही तरीके से अपडेट की जा सकती है।
3. बैंक खाते में नाम अपडेट करने में
यदि शादी के बाद पत्नी अपना सरनेम बदलती हैं या संयुक्त बैंक खाता (Joint Account) खुलवाना हो, तो बैंक विवाह प्रमाण पत्र की मांग कर सकता है। यह बैंक को वैवाहिक संबंध की पुष्टि करने में मदद करता है और भविष्य में किसी कानूनी विवाद से बचाता है।
4. संपत्ति से जुड़े कागजातों में
संपत्ति की खरीद-फरोख्त, नामांतरण (Mutation), या पति-पत्नी के संयुक्त स्वामित्व से जुड़े मामलों में विवाह प्रमाण पत्र जरूरी हो सकता है। यह साबित करता है कि दोनों के बीच कानूनी संबंध है, जिससे उत्तराधिकार या अधिकार से जुड़ी प्रक्रिया आसान हो जाती है।
5. सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में
कई सरकारी योजनाएँ ऐसी होती हैं जिनमें पति-पत्नी की संयुक्त जानकारी आवश्यक होती है। जैसे परिवार आधारित लाभ, पेंशन, बीमा या सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ। ऐसे मामलों में विवाह प्रमाण पत्र वैवाहिक स्थिति का आधिकारिक प्रमाण देता है।
6. विदेश यात्रा या वीज़ा प्रक्रिया में
यदि पति-पत्नी साथ में विदेश यात्रा कर रहे हों या स्पाउस वीज़ा (Spouse Visa) के लिए आवेदन कर रहे हों, तो दूतावास विवाह प्रमाण पत्र की मांग करता है। यह दस्तावेज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी वैध माना जाता है और वीज़ा प्रक्रिया को सुचारू बनाता है।
इसीलिए, विवाह प्रमाण पत्र केवल एक कागज़ नहीं बल्कि भविष्य के कई महत्वपूर्ण कार्यों के लिए जरूरी कानूनी दस्तावेज है।
फीस और समय अवधि
विवाह प्रमाण पत्र बनवाने की फीस राज्य, शहर और आवेदन की प्रक्रिया के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। सामान्य तौर पर यह शुल्क लगभग ₹100 से ₹1000 के बीच रहता है। कई जगहों पर यदि विवाह के तुरंत बाद पंजीयन कराया जाता है, तो फीस कम होती है, जबकि लंबे समय बाद आवेदन करने पर विलंब शुल्क (Late Fee) भी देना पड़ सकता है। ऑनलाइन आवेदन करने पर कुछ राज्यों में अतिरिक्त सेवा शुल्क या पोर्टल चार्ज भी जुड़ सकता है, जो कुल फीस को थोड़ा बढ़ा देता है। इसलिए आवेदन करने से पहले संबंधित नगर पालिका, पंचायत या सेवा केंद्र से सही शुल्क की जानकारी लेना बेहतर रहता है।
समय की बात करें तो आवेदन जमा करने के बाद विवाह प्रमाण पत्र मिलने में आमतौर पर 15 दिन से लेकर 1 महीने तक का समय लग सकता है। इस दौरान अधिकारियों द्वारा दस्तावेजों की जाँच, रिकॉर्ड सत्यापन और आवश्यक औपचारिकताएँ पूरी की जाती हैं। यदि सभी दस्तावेज सही हों और प्रक्रिया समय पर पूरी हो जाए, तो प्रमाण पत्र जल्दी भी मिल सकता है। लेकिन किसी दस्तावेज की कमी, गलत जानकारी, या सत्यापन में देरी होने पर प्रक्रिया थोड़ा लंबा समय ले सकती है। इसलिए आवेदन करते समय सभी जरूरी दस्तावेज सही और पूरे तरीके से जमा करना जरूरी होता है, ताकि प्रमाण पत्र समय पर प्राप्त हो सके।
FAQs
विवाह प्रमाण पत्र क्या होता है?
विवाह प्रमाण पत्र एक सरकारी दस्तावेज़ है, जो यह प्रमाणित करता है कि दो व्यक्ति कानूनी रूप से विवाहित हैं। इसे शादी के वैधानिक रिकॉर्ड के रूप में स्वीकार किया जाता है।
विवाह प्रमाण पत्र क्यों जरूरी है?
यह दस्तावेज कई जगहों पर काम आता है, जैसे पासपोर्ट, बैंक कार्य, सरकारी योजनाओं का लाभ, संपत्ति के कागजात, नामांकन अपडेट आदि। इसलिए इसे बनवाना लाभदायक और आवश्यक माना जाता है।
विवाह प्रमाण पत्र कहाँ बनता है?
शहरी इलाकों में आप नगर पालिका/नगर निगम कार्यालय में आवेदन करते हैं।
ग्रामीण इलाकों में जनपद पंचायत या पंचायत कार्यालय से प्रमाण पत्र बनता है।
कई जगह अब ऑनलाइन आवेदन की भी सुविधा उपलब्ध है।
विवाह प्रमाण पत्र बनाने के लिए कौन-कौन से दस्तावेज चाहिए?
आवश्यक दस्तावेजों में शामिल हैं:
- पति-पत्नी के पहचान पत्र (आधार/वोटर आईडी)
- पासपोर्ट साइज फोटो
- निवास प्रमाण पत्र
- जन्म/आयु प्रमाण (जैसे 10वीं मार्कशीट)
- विवाह का सबूत (कार्ड, पंडित सर्टिफिकेट, गवाह बयान आदि)
विवाह प्रमाण पत्र की फीस कितनी होती है?
फीस राज्य और प्रक्रिया के अनुसार अलग होती है, सामान्यतः ₹100 से ₹1000 तक होती है। कुछ जगहों पर ऑनलाइन सेवा शुल्क भी लागू हो सकता है।
विवाह प्रमाण पत्र मिलने में कितना समय लगता है?
आम तौर पर आवेदन के बाद 15 दिन से 1 महीने के भीतर प्रमाण पत्र मिल जाता है। कभी-कभी सत्यापन प्रक्रिया लंबी होने पर समय थोड़ा बढ़ सकता है।
क्या विवाह प्रमाण पत्र ऑनलाइन बन सकता है?
हाँ, कई नगर पालिका और राज्य सरकारें अब ऑनलाइन आवेदन सुविधा देती हैं। आप फॉर्म भरकर और दस्तावेज़ अपलोड करके घर बैठे भी आवेदन कर सकते हैं। सत्यापन के लिए कभी-कभी कार्यालय आने की जरूरत पड़ सकती है।
अगर विवाह प्रमाण पत्र खो जाए तो क्या करें?
यदि प्रमाण पत्र खो जाए या नष्ट हो जाए, तो आप डुप्लीकेट प्रमाण पत्र के लिए फिर से आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए संबंधित कार्यालय में FIR/आवेदन लगाकर नया प्रमाण पत्र प्राप्त किया जा सकता है।
क्या विवाह प्रमाण पत्र विदेश वीज़ा/यात्रा के लिए जरूरी है?
जी हाँ, विदेश वीज़ा प्रक्रिया में कई बार विवाह प्रमाण पत्र की आवश्यकता होती है, खासकर जब जीवनसाथी के साथ वीज़ा या पर्यटन योजना बनाते हैं।
क्या शादी के तुरंत बाद प्रमाण पत्र बनवाना आवश्यक है?
हाँ, विवाह के तुरंत बाद प्रमाण पत्र बनवाना बेहतर होता है ताकि भविष्य में किसी भी प्रशासनिक, कानूनी या सरकारी प्रक्रिया में दिक्कत न आए।
निष्कर्ष
विवाह प्रमाण पत्र केवल एक औपचारिक दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह आपके वैवाहिक जीवन का कानूनी और आधिकारिक प्रमाण भी है। यह दस्तावेज शादी की वैधता को साबित करता है और भविष्य में पासपोर्ट बनवाने, बैंक और सरकारी रिकॉर्ड अपडेट करने, संपत्ति से जुड़ी प्रक्रियाओं या सरकारी योजनाओं का लाभ लेने जैसे कई जरूरी मामलों में सहायक होता है। इसलिए शादी के तुरंत बाद विवाह प्रमाण पत्र बनवाना सबसे समझदारी भरा कदम माना जाता है।
वर्तमान में विवाह प्रमाण पत्र बनवाना काफी आसान हो गया है। शहरी क्षेत्रों में आप अपने नजदीकी नगर पालिका या नगर निगम कार्यालय से आवेदन कर सकते हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह प्रक्रिया जनपद पंचायत कार्यालय के माध्यम से पूरी होती है। इसके अलावा लोक सेवा केंद्र (PSC) और ग्राहक सेवा केंद्र (CSC) भी आवेदन प्रक्रिया में मदद प्रदान करते हैं, जैसे फॉर्म भरना, दस्तावेज़ अपलोड करना और प्रक्रिया की जानकारी देना। समय और आवश्यक दस्तावेजों की पूरी जानकारी लेकर आवेदन करने से आप आसानी से और जल्दी अपना विवाह प्रमाण पत्र प्राप्त कर सकते हैं।
इस प्रकार, विवाह प्रमाण पत्र आपके कानूनी अधिकारों की सुरक्षा करता है और भविष्य में किसी भी तरह के प्रशासनिक या कानूनी कार्य में आपका मार्गदर्शन करता है। इसे बनवाना सिर्फ वैधानिक आवश्यकता नहीं, बल्कि भविष्य की आसान और सुरक्षित व्यवस्था सुनिश्चित करने का भी तरीका है।
