Multi Tasking छोड़कर Single Tasking अपनाएँ: बेहतर फोकस और ज्यादा प्रोडक्टिविटी का तरीका
| मल्टीटास्किंग (Multi Tasking) छोड़कर सिंगल-टास्किंग अपनाएँ |
आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में हम खुद को ज़्यादा बिज़ी दिखाने के लिए एक साथ कई काम करने लगते हैं। ईमेल चेक करना, कॉल अटेंड करना, मैसेज का जवाब देना और साथ-साथ कोई दूसरा काम — यह सब हमें लगता है कि हम बहुत प्रोडक्टिव हैं।
लेकिन हकीकत यह है कि मल्टीटास्किंग हमारी प्रोडक्टिविटी नहीं बढ़ाती, बल्कि फोकस और क्वालिटी दोनों को कम कर देती है।
यही वजह है कि आज एक्सपर्ट्स और सफल लोग सिंगल-टास्किंग को ज़्यादा असरदार मानते हैं।
मल्टीटास्किंग क्यों नुकसानदायक है?
मल्टीटास्किंग में हमारा दिमाग बार-बार एक काम से दूसरे काम पर शिफ्ट करता है।
इस प्रक्रिया में:
ध्यान बार-बार टूटता है
दिमाग ज़्यादा थकता है
काम में गलतियाँ बढ़ती हैं
किसी भी काम पर पूरा फोकस नहीं बन पाता
लंबे समय तक मल्टीटास्किंग करने से मानसिक थकान और चिड़चिड़ापन भी बढ़ सकता है।
एक बार में एक काम करने से क्वालिटी कैसे बढ़ती है?
जब हम एक समय में सिर्फ एक ही काम पर ध्यान देते हैं, तो दिमाग की पूरी एनर्जी उसी काम में लगती है।
इसका सीधा फायदा यह होता है कि:
काम की क्वालिटी बेहतर होती है
गलतियाँ कम होती हैं
काम कम समय में पूरा हो जाता है
आउटपुट ज़्यादा प्रोफेशनल लगता है
सिंगल-टास्किंग में किए गए काम का रिज़ल्ट साफ और संतोषजनक दिखाई देता है।
सिंगल-टास्किंग से स्ट्रेस क्यों कम होता है?
मल्टीटास्किंग में दिमाग लगातार प्रेशर में रहता है — “अगला काम भी करना है, यह भी अधूरा है।”
इससे स्ट्रेस बढ़ता है।
वहीं सिंगल-टास्किंग में:
दिमाग ज़्यादा शांत और फोकस्ड रहता है
काम कंट्रोल में महसूस होता है
जल्दबाज़ी कम होती है
दिन के अंत में संतुष्टि मिलती है
यही कारण है कि सिंगल-टास्किंग मानसिक शांति के लिए भी बहुत फायदेमंद है।
सिंगल-टास्किंग अपनाने का आसान तरीका
अगर आप सिंगल-टास्किंग शुरू करना चाहते हैं, तो ये छोटे स्टेप्स अपनाएँ:
एक समय में सिर्फ एक ही टास्क चुनें
नोटिफिकेशन और अनावश्यक ऐप्स बंद रखें
ईमेल और कॉल के लिए अलग समय तय करें
काम को छोटे-छोटे हिस्सों में बाँटें
धीरे-धीरे यह आदत बन जाती है और फोकस अपने आप बढ़ने लगता है।
सिंगल-टास्किंग का मेरा अनुभव
मैं पहले ईमेल और कॉल दोनों एक साथ करने की कोशिश करता था।
इससे अक्सर कन्फ्यूजन होता था और कोई भी काम ठीक से पूरा नहीं हो पाता था।
फिर मैंने ईमेल और कॉल के लिए अलग-अलग समय तय किया।
नतीजा यह हुआ कि:
काम ज़्यादा क्लियर होने लगा
गलतियाँ कम हुईं
स्ट्रेस भी काफी घट गया
इस छोटे से बदलाव ने मेरी डेली प्रोडक्टिविटी को काफी बेहतर बना दिया।
निष्कर्ष
मल्टीटास्किंग छोड़ना आसान नहीं है, लेकिन सिंगल-टास्किंग अपनाना बेहद फायदेमंद है।
अगर आप सच में बेहतर रिज़ल्ट, कम स्ट्रेस और ज़्यादा संतुष्टि चाहते हैं, तो एक समय में एक ही काम पर फोकस करना सीखें।
याद रखिए —
👉 कम काम, लेकिन बेहतर काम ही असली प्रोडक्टिविटी है।